सुकून...!😊
* सुकून * ....! आजकल खुदको मजबूत बनाने की कोशिश कर रही हू। नए लोगों से बात करती हू। नए खयाल ढालने की दिल से कोशिश करती हू। आज में अकेली बैठी हुई हू। आसपास कुछ पेड़-पौधे है, कुछ पंछी है। वो परबत है जो मैं बचपन से देखती आयी हू। आज में अपनी प्यारी दोस्त कलम से भी छुपकर बैठी हू। कुछ ऐसा खोज रही हू जिससे मेरे मन में चल रहा तुफान रूक जाए। किसी समुंदर की धारा की तरह में बैचेन हू। मुझे बस इतना पता है, कुछ सवाल मेरे है जिनको खोजना सिर्फ मुझे है। निराशा के बारे में मैं सोचना भी नहीं चाहती। जब कभी अकेली बैठती हू। मेरा मन मुझसे बाते करता है। वैसे तो हर घडी वो साथ होता है।।लेकिन जब कभी मुझे कुछ फैसला करना हो तो वो ज्यादा समझदार हो जाता है। हिंदी में लिखने की वजह हिंदी मुझे प्यारी लगती है । मुझे अपनापन महसूस होता है। कुछ समय ऐसा भी होता है जब हमें किसी और के समझाने की जरूरत नहीं होती। बीते पलों के बारे में सोचकर आज को भूलना भला कहा की समझदारी है? कई फिल्में देखकर में उनका समीक्षण करना पसंद करती हू। कुछ किस्...